दक्षिणाभिमुख घर वास्तु जाणून घ्या

नवीन घर विकत घेताना किंवा बांधताना सर्वांत जास्त विचारला जाणारा प्रश्न असतो – “दक्षिणाभिमुख घर शुभ आहे का?”
बरेच लोक याला नकारात्मक मानतात, पण वास्तुशास्त्र सांगते की योग्य नियम पाळले तर दक्षिणाभिमुख घरसुद्धा तितकेच यशस्वी आणि शुभ ठरू शकते.


दक्षिणाभिमुख घराचे महत्व

दक्षिण दिशा ही अग्नी आणि शक्तीची दिशा मानली जाते. ही आत्मविश्वास, कीर्ती आणि सामर्थ्याचे प्रतीक आहे. जर दक्षिणाभिमुख घर वास्तुनुसार बांधले गेले तर ते देते:

  • व्यवसायात यश आणि प्रतिष्ठा.
  • नेतृत्व व राजकारण क्षेत्रातील लोकांना प्रगती.
  • आत्मविश्वास आणि धैर्याची वाढ.
  • कुटुंबासाठी स्थैर्य आणि सुरक्षितता.

परंतु जर घरात वास्तुदोष असतील तर आरोग्याच्या समस्या, वादविवाद किंवा आर्थिक नुकसान होऊ शकते.

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Do’s आणि Don’ts – South Facing House Vastu

करा ✅

  • मुख्य दरवाजा दक्षिण-पूर्व (अग्नीकोन) मध्ये ठेवा.
  • स्वयंपाकघरही दक्षिण-पूर्व दिशेत असावे.
  • मास्टर बेडरूम दक्षिण-पश्चिमेत असावा.
  • पूजा घर ईशान्य (North-East) कोपऱ्यात असावे.
  • भिंतींसाठी पिवळा, क्रीम किंवा पांढरा असे हलके रंग वापरा.

करू नका ❌

  • दक्षिण-पश्चिमेत मुख्य दरवाजा ठेवणे टाळा.
  • ईशान्य दिशेत शौचालय ठेवू नका.
  • दक्षिण दिशेत पाण्याचा टाकी ठेवू नका.
  • काळा किंवा गडद निळा रंग टाळा.
  • घराचा मध्यभाग (ब्रह्मस्थान) जड व अस्ताव्यस्त ठेवू नका.

प्रत्यक्ष उपयोग

  • कुटुंबासाठी: दक्षिणाभिमुख घर आत्मविश्वास आणि धैर्य देते.
  • व्यापाऱ्यांसाठी: योग्य वास्तु केल्यास व्यवसायात विस्तार आणि ग्राहकांचा विश्वास मिळतो.
  • नेते व राजकारण्यांसाठी: ही दिशा नेतृत्वगुण आणि प्रभाव वाढवते.
  • अस्तित्वात असलेल्या घरासाठी: जर दोष असतील तर झाडे, रंग किंवा साधे वास्तु उपाय करून सुधारणा करता येते.

तज्ज्ञ मत – डॉ. शिवकुमारर गोरे

“बहुतेक लोक समजतात की दक्षिणाभिमुख घर अशुभ असते. पण खरे म्हणजे, जर मुख्य दरवाजा व खोल्यांची मांडणी योग्य जागी असेल तर हे घर सामर्थ्य आणि यशाचे स्रोत ठरते. मी अनेक कुटुंबे आणि व्यापारी यांना साध्या वास्तु उपायांनी सकारात्मक बदल अनुभवताना पाहिले आहे.”

२२+ वर्षांच्या अनुभवात डॉ. गोरे यांनी 5000+ कुटुंबे आणि बांधकाम व्यावसायिकांना South Facing House Vastu आणि वास्तु उपायांद्वारे मार्गदर्शन केले आहे.
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निष्कर्ष

दक्षिणाभिमुख घरे वास्तुशास्त्रानुसार अशुभ नाहीत. ही दिशा सामर्थ्य आणि आत्मबलाची आहे. योग्य नियम पाळल्यास हे घर आरोग्य, यश आणि स्थैर्य देते.
लक्षात ठेवा – वास्तुदोष असल्यास घाबरू नका, योग्य उपाय करून ऊर्जा संतुलित करा.


वारंवार विचारले जाणारे प्रश्न (FAQs)

Q1. दक्षिणाभिमुख घर शुभ आहे का?
👉 हो, जर वास्तुनुसार बांधले गेले असेल तर.

Q2. मुख्य दरवाजा कुठे असावा?
👉 दक्षिण-पूर्व दिशेत.

Q3. मास्टर बेडरूम कुठे असावा?
👉 दक्षिण-पश्चिम दिशेत.

Q4. पूजा घर कुठे ठेवावे?
👉 ईशान्य (North-East) कोपऱ्यात.

Q5. दक्षिणाभिमुख घरात सर्वात मोठी चूक कोणती?
👉 दक्षिण-पश्चिमेत प्रवेशद्वार आणि ईशान्येत शौचालय ठेवणे.


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ईस्ट फेसिंग घर वास्तु और उसका महत्व

जब लोग नया घर खरीदते या बनाते हैं, तो अक्सर सवाल उठता है – “क्या ईस्ट फेसिंग घर अच्छा होता है?”
वास्तु शास्त्र के अनुसार, पूर्व दिशा (East) सूर्य देव की दिशा है और इसे जीवन, स्वास्थ्य और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि ईस्ट फेसिंग घर को बहुत शुभ और उन्नति देने वाला माना जाता है।

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पूर्व दिशा वाले घर का महत्व

ईस्ट फेसिंग घर में प्रवेश करने से परिवार के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, सेहत और प्रगति आती है।

  • यह दिशा स्वास्थ्य और लंबी आयु का प्रतीक है।
  • बच्चों और विद्यार्थियों के लिए एकाग्रता और सफलता लाती है।
  • करियर और नौकरी में अवसर बढ़ाती है।
  • घर के सदस्यों के बीच आपसी सामंजस्य और खुशी बनाए रखती है।

लेकिन अगर वास्तु दोष हो (जैसे कि गलत जगह किचन या टॉयलेट), तो समस्याएँ भी हो सकती हैं।


Do’s और Don’ts – East Facing House Vastu

Do’s ✅

  • मुख्य द्वार (Main Entrance) ईशान कोण (North-East) या पूर्व दिशा में रखें।
  • ड्रॉइंग रूम और लिविंग रूम ईस्ट या नॉर्थ में बनाएं।
  • पूजा घर (Pooja Room) हमेशा नॉर्थ-ईस्ट में रखें।
  • किचन को South-East (अग्नि कोण) में रखें और चूल्हा पूर्व दिशा की ओर रखें।
  • मास्टर बेडरूम South-West में रखें।
  • हल्के रंग जैसे क्रीम, सफेद या हल्का पीला इस्तेमाल करें।

Don’ts ❌

  • ईस्ट फेसिंग घर में साउथ-वेस्ट दिशा में मुख्य द्वार न रखें।
  • नॉर्थ-ईस्ट में टॉयलेट बिल्कुल न बनाएं।
  • पूर्व दिशा में भारी सामान या स्टोर रूम न रखें।
  • गहरे काले या नीले रंग का उपयोग न करें।
  • केंद्र (Brahmasthan) को भारी और गंदा न रखें।

प्रैक्टिकल अप्लिकेशंस

  • परिवारों के लिए: ईस्ट फेसिंग घर स्वास्थ्य और शांति के लिए अच्छा है।
  • विद्यार्थियों के लिए: पूर्व दिशा में पढ़ाई करने से एकाग्रता और सफलता बढ़ती है।
  • प्रोफेशनल्स के लिए: करियर में नए अवसर और प्रमोशन आते हैं।
  • बिज़नेस वालों के लिए: ग्राहक विश्वास और नए प्रोजेक्ट्स में सफलता।
  • मौजूदा घर के लिए: अगर कोई दोष है, तो पौधे, रंग या वास्तु उपाय से सुधार किया जा सकता है।

विशेषज्ञ की राय – डॉ. शिवकुमारर गोरे

“ईस्ट फेसिंग घर सूर्य की ऊर्जा को सीधे आकर्षित करता है। यह स्वास्थ्य, सफलता और खुशहाली का प्रतीक है। लेकिन कई बार गलत प्लानिंग (जैसे नॉर्थ-ईस्ट में टॉयलेट या किचन) समस्याएँ पैदा कर देती हैं। सही वास्तु सुधार से घर की ऊर्जा तुरंत बदल सकती है।”

22+ साल के अनुभव में, डॉ. गोरे ने 5000+ परिवारों और बिल्डर्स को East Facing House Vastu और वास्तु उपायों से मार्गदर्शन दिया है।
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निष्कर्ष

ईस्ट फेसिंग घर को वास्तु में बहुत शुभ माना गया है। यह सेहत, करियर और पारिवारिक सामंजस्य के लिए बेहतरीन होता है। सही दिशा में प्रवेश द्वार, पूजा घर और किचन रखने से घर में शांति और समृद्धि बनी रहती है।
याद रखें – अगर घर में दोष है, तो आसान वास्तु उपाय से उसे संतुलित किया जा सकता है।


FAQs

Q1. क्या ईस्ट फेसिंग घर शुभ होता है?
👉 हाँ, यह सेहत, प्रगति और खुशहाली देता है।

Q2. मुख्य द्वार कहाँ होना चाहिए?
👉 ईशान कोण (North-East) या पूर्व दिशा में।

Q3. किचन किस दिशा में होना चाहिए?
👉 South-East (अग्नि कोण)।

Q4. पूजा घर किस दिशा में रखना चाहिए?
👉 नॉर्थ-ईस्ट।

Q5. ईस्ट फेसिंग घर में क्या नहीं करना चाहिए?
👉 नॉर्थ-ईस्ट में टॉयलेट, साउथ-वेस्ट में प्रवेश द्वार और भारी सामान।


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North Facing House Vastu and Its Significance

When buying or constructing a home, one of the most common questions people ask is—“Is a North facing house good as per vastu?”
The answer is yes! In vastu shastra, the North direction is ruled by Lord Kubera, the god of wealth. That’s why North facing houses are often associated with prosperity, career growth, and opportunities. But like every direction, it comes with its own set of rules and considerations.

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Why North Facing House is Significant

The North direction represents financial growth and opportunities. A vastu-compliant North facing home ensures:

  • Smooth money flow and financial stability.
  • Good career opportunities for working professionals.
  • Business growth and client expansion for entrepreneurs.
  • Peace and harmony in family life.

However, if the entrance or design is not aligned properly, it can cause instability. Hence, proper North facing house vastu guidelines are important.

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Do’s and Don’ts for North Facing Homes

Do’s ✅

  • Keep the main entrance in North or North-East direction.
  • Build living rooms and drawing rooms in North or East.
  • Place the puja room in North-East (Ishanya) corner.
  • Kitchen should be in South-East, with the stove facing East.
  • Master bedroom should be in South-West for stability.
  • Use green or light colors to enhance positivity in the North.

Don’ts ❌

  • Avoid toilets in North-East corner.
  • Don’t keep heavy storage or clutter in the North.
  • Avoid placing the kitchen in North direction.
  • Don’t keep the main entrance in South-West.
  • Avoid using black or dark colors in North.

Practical Applications

  • For Families: North facing homes are excellent for financial stability.
  • For Professionals: These houses bring better career opportunities.
  • For Students: Studying while facing North improves concentration.
  • For Businesses: Shops or offices in North facing buildings attract more customers.
  • For Existing North Homes: Even if some defects are there, vastu remedies like mirrors, plants, and colors can balance the energy.

Expert Note – Dr. Shivkumarr Gorey

“North facing houses are naturally blessed with wealth energy. But I have seen many cases where wrong placements (like kitchen in North or toilets in North-East) created blockages. Simple vastu corrections can restore the flow of prosperity.”

With 22+ years of experience, Dr. Gorey has guided 5000+ families with house vastu, vastu remedies, and North facing house corrections.
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Conclusion

North facing houses are highly auspicious as per vastu shastra, especially for wealth and career growth. With correct placement of entrance, kitchen, and bedrooms, you can enjoy peace, prosperity, and progress.
Remember—even if your North facing home has defects, simple remedies can bring balance.


FAQs

Q1. Is North facing house good as per vastu?
👉 Yes, it is considered very lucky for wealth and opportunities.

Q2. Where should the entrance be in a North facing home?
👉 North or North-East direction.

Q3. Where should the kitchen be in North facing homes?
👉 South-East is ideal.

Q4. What colors are best for North facing houses?
👉 Light green, cream, or white shades.

Q5. Are North facing houses good for business people?
👉 Yes, they attract customers and growth.


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घराच्या आराखड्यात आणि डिझाइनमध्ये वास्तुचे सिद्धांत

घर हे फक्त भिंती आणि फर्निचर यापुरते मर्यादित नसते—तेथेच कुटुंब वाढते, नाती घट्ट होतात आणि आयुष्य फुलते. पण काही घरे शांत व समाधानदायी का वाटतात आणि काही ठिकाणी तणाव व जडपणा का जाणवतो? याचे उत्तर बहुतेकदा वास्तुशास्त्रात दडलेले असते.
घराचा आराखडा आणि डिझाइन जर वास्तुशास्त्राच्या सिद्धांतानुसार केले, तर ते नैसर्गिक ऊर्जेशी जुळते आणि कुटुंबाला आरोग्य, समृद्धी आणि आनंद देते.

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घराच्या डिझाइनमध्ये वास्तु का महत्त्वाचा आहे?

वास्तुशास्त्र हे प्राचीन भारतीय वास्तुकलेचे विज्ञान आहे जे पाच तत्वांना—पृथ्वी, जल, अग्नी, वायू आणि आकाश—दिशांशी जोडते.
वास्तुसंगत घर ऊर्जेचे संतुलन राखते आणि सकारात्मक ऊर्जेचा प्रवाह घरभर ठेवते.

  • उत्तर आणि पूर्व दिशा: धन, आरोग्य आणि संधींसाठी.
  • दक्षिण-पूर्व (अग्निकोन): स्वयंपाकघर व अग्नीशी संबंधित कार्यांसाठी.
  • दक्षिण-पश्चिम: शयनकक्षासाठी, स्थैर्य मिळवण्यासाठी उत्तम.
  • उत्तर-पूर्व (ईशान्य): पूजा कक्ष किंवा ध्यानासाठी.
  • मध्यभाग (ब्रह्मस्थान): नेहमी मोकळा, स्वच्छ आणि अव्यवस्थित नसावा.

घराच्या वास्तुसाठी Do’s आणि Don’ts

Do’s ✅

  • मुख्य दरवाजा उत्तर किंवा पूर्व दिशेला असावा.
  • पूर्व किंवा उत्तर दिशेला खिडक्या व बाल्कनी ठेवाव्यात जेणेकरून हवा व सूर्यप्रकाश मिळेल.
  • स्वयंपाकघर दक्षिण-पूर्व दिशेत असावे आणि स्वयंपाक करताना तोंड पूर्वेकडे असावे.
  • मास्टर बेडरूम दक्षिण-पश्चिम दिशेत असावी.
  • पूजा घर उत्तर-पूर्व कोपऱ्यात ठेवावे.
  • भिंतींवर हलके रंग जसे पांढरा, पिवळा किंवा क्रीम वापरावा.

Don’ts ❌

  • उत्तर-पूर्व कोपऱ्यात शौचालय करू नये.
  • घराचा मध्यभाग (ब्रह्मस्थान) जड वस्तूंनी किंवा कचऱ्याने भरू नये.
  • अनियमित आकाराची घरे किंवा भूखंड टाळावेत.
  • भिंतींवर गडद किंवा निस्तेज रंग वापरू नयेत.
  • दक्षिणमुखी प्रवेशद्वार योग्य उपायांशिवाय ठेवू नये.

व्यावहारिक उपयोग

  • नवीन घरांसाठी: बांधकाम करताना वास्तु तज्ज्ञांचा सल्ला घ्यावा.
  • मौजूदा घरांसाठी: डिझाइन योग्य नसेल तरी झाडे, आरसे, लाईटिंग किंवा फर्निचर बदलून ऊर्जेचा प्रवाह सुधारता येतो.
  • अपार्टमेंटसाठी: फ्लॅट्समध्येही मुख्य दरवाजा, स्वयंपाकघर व शयनकक्ष वास्तुनुसार ठेवले तर मोठा फरक पडतो.

तज्ज्ञांचे मत – डॉ. शिवकुमार गोरे

“घराची योजना ही फक्त इंटेरियरबद्दल नसते—ती ऊर्जेची योजना असते. वास्तुसंगत घरात आपोआप आरोग्य व समृद्धी येते. अगदी छोटे बदल, जसे पलंगाची दिशा बदलणे किंवा ईशान्य कोपऱ्यात प्रकाश वाढवणे, आयुष्यात मोठा फरक घडवतात.”

२२+ वर्षांच्या अनुभवासह, डॉ. गोरे यांनी हजारो कुटुंबांना गृह वास्तु, वास्तु डिझाइन आणि सोपे उपाय यांद्वारे मार्गदर्शन केले आहे.
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निष्कर्ष

घराचा आराखडा आणि डिझाइन जर वास्तु सिद्धांतांनुसार केले, तर घर खऱ्या अर्थाने आनंद आणि प्रगतीचे ठिकाण बनते. प्रवेशद्वारापासून पूजा खोलीपर्यंत प्रत्येक दिशेचे स्वतःचे महत्त्व आहे. घर जर वास्तुसंगत असेल, तर सकारात्मक ऊर्जा, शांतता आणि समृद्धी तुमच्या जीवनात येते.


FAQs

Q1. घराचा मुख्य दरवाजा कोणत्या दिशेला असावा?
👉 उत्तर किंवा पूर्व.

Q2. स्वयंपाकघर कुठे असावे?
👉 दक्षिण-पूर्व कोपरा सर्वोत्तम आहे.

Q3. पूजा घर कुठे ठेवावे?
👉 उत्तर-पूर्व दिशेला.

Q4. फ्लॅट्समध्येही वास्तु लागू होतो का?
👉 हो, अपार्टमेंट्समध्येही काही छोटे बदल केल्याने फायदा होतो.

Q5. घराच्या डिझाइनमध्ये कोणत्या गोष्टी टाळाव्यात?
👉 उत्तर-पूर्व दिशेला शौचालय, मध्यभागी अव्यवस्था आणि दक्षिणमुखी प्रवेशद्वार.


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घर की योजना और डिज़ाइन में वास्तु सिद्धांत

घर सिर्फ दीवारों और फर्नीचर का नाम नहीं है—यह वह जगह है जहाँ परिवार बढ़ता है, रिश्ते गहराते हैं और जीवन खिलता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ घर शांत और सुकून भरे क्यों लगते हैं, जबकि कुछ घरों में बेचैनी या तनाव महसूस होता है? इसका जवाब अक्सर वास्तु शास्त्र में छिपा होता है।
अगर घर की योजना और डिज़ाइन वास्तु सिद्धांतों के अनुसार की जाए, तो वह प्राकृतिक ऊर्जा के साथ जुड़ जाता है और परिवार को स्वास्थ्य, समृद्धि और खुशहाली देता है।

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घर की डिज़ाइन में वास्तु क्यों ज़रूरी है

वास्तु शास्त्र प्राचीन भारतीय वास्तुकला का विज्ञान है जो पाँच तत्वों—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश—को दिशाओं से जोड़ता है।
वास्तु अनुसार बने घर में इन तत्वों का संतुलन रहता है और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है।

  • उत्तर और पूर्व दिशा: धन, स्वास्थ्य और अवसरों के लिए।
  • दक्षिण-पूर्व (अग्नि कोण): रसोई और अग्नि से जुड़े कार्यों के लिए।
  • दक्षिण-पश्चिम: शयनकक्ष के लिए, स्थिरता के लिए सबसे उपयुक्त।
  • उत्तर-पूर्व (ईशान कोण): पूजा घर या ध्यान कक्ष के लिए।
  • मध्य (ब्रह्मस्थान): हमेशा खुला और बिना अव्यवस्था के होना चाहिए।

घर के वास्तु में Do’s और Don’ts

Do’s ✅

  • मुख्य द्वार उत्तर या पूर्व दिशा में रखें।
  • पूर्व या उत्तर की ओर खिड़कियाँ और बालकनी बनवाएँ ताकि धूप और हवा मिले।
  • रसोई दक्षिण-पूर्व में हो और खाना पकाते समय मुख पूर्व की ओर रहे।
  • मास्टर बेडरूम दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना चाहिए।
  • पूजा घर उत्तर-पूर्व कोने में रखें।
  • दीवारों के लिए हल्के रंग जैसे सफेद, पीला या क्रीम चुनें।

Don’ts ❌

  • उत्तर-पूर्व कोने में शौचालय न बनवाएँ।
  • घर के केंद्र (ब्रह्मस्थान) को भारी सामान या अव्यवस्था से न भरें।
  • अनियमित आकार की ज़मीन या घर से बचें।
  • दीवारों पर गहरे या मटमैले रंगों का इस्तेमाल न करें।
  • दक्षिण दिशा का प्रवेश द्वार बिना उपायों के न रखें।

व्यावहारिक उपयोग

  • नए घरों के लिए: निर्माण के समय वास्तु विशेषज्ञ से परामर्श लें।
  • मौजूदा घरों के लिए: अगर डिज़ाइन वास्तु अनुसार नहीं है तो पौधे, लाइटिंग, आइना या फर्नीचर बदलकर सुधार करें।
  • अपार्टमेंट्स के लिए: फ्लैट्स में भी बुनियादी वास्तु सिद्धांत जैसे प्रवेश, रसोई और शयनकक्ष लागू किए जा सकते हैं।

विशेषज्ञ की राय – डॉ. शिवकुमार गोरे

“घर की योजना सिर्फ इंटीरियर के बारे में नहीं है, बल्कि ऊर्जा की योजना के बारे में है। वास्तु के अनुसार बने घर में स्वाभाविक रूप से स्वास्थ्य और समृद्धि आती है। यहाँ तक कि छोटे-छोटे बदलाव, जैसे बिस्तर की दिशा बदलना या उत्तर-पूर्व में रोशनी बढ़ाना, जीवन में बड़ा सुधार ला सकते हैं।”

22+ वर्षों के अनुभव के साथ, डॉ. गोरे ने हजारों परिवारों को गृह वास्तु, वास्तु डिज़ाइन और व्यावहारिक उपायों से मार्गदर्शन दिया है।
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निष्कर्ष

वास्तु सिद्धांतों के अनुसार घर की योजना और डिज़ाइन करने से यह सचमुच खुशियों और प्रगति का स्थान बन जाता है। प्रवेश द्वार से लेकर पूजा घर तक हर दिशा का महत्व है। जब आप अपने घर को वास्तु शास्त्र के अनुरूप बनाते हैं, तो आप सकारात्मक ऊर्जा, शांति और समृद्धि को अपने जीवन में आमंत्रित करते हैं।


FAQs

Q1. घर का मुख्य द्वार किस दिशा में होना चाहिए?
👉 उत्तर या पूर्व दिशा।

Q2. घर में रसोई कहाँ होनी चाहिए?
👉 दक्षिण-पूर्व कोना सबसे अच्छा है।

Q3. पूजा घर किस दिशा में रखें?
👉 उत्तर-पूर्व कोने में।

Q4. क्या फ्लैट्स में भी वास्तु लागू होता है?
👉 हाँ, अपार्टमेंट्स में भी बुनियादी सुधार किए जा सकते हैं।

Q5. घर की डिज़ाइन में किन बातों से बचना चाहिए?
👉 उत्तर-पूर्व में शौचालय, अव्यवस्थित केंद्र, और दक्षिणमुखी प्रवेश।


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Vastu Principles for Home Planning and Design

A home is more than walls and furniture—it’s the space where families grow, relationships thrive, and life blossoms. But have you ever wondered why some houses feel peaceful while others feel heavy or stressful? The answer often lies in Vastu Shastra.
When homes are planned and designed according to vastu principles, they align with natural energies, ensuring harmony, prosperity, and good health.

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Importance of Vastu in Home Design

Vastu Shastra is the ancient Indian science of architecture that connects the five elements—earth, water, fire, air, and space—with directions. A vastu-friendly home design balances these elements, allowing positive energy to flow freely.

  • North & East zones: For wealth, health, and opportunities.
  • South-East zone: Kitchen and fire-related activities.
  • South-West zone: Bedrooms for stability.
  • North-East zone: Best for pooja room or meditation space.
  • Center (Brahmasthan): Should be kept open and clutter-free.

By following these principles, you create a home that supports growth and well-being.

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Do’s and Don’ts in Home Vastu

Do’s ✅

  • Place the main entrance in the North or East direction.
  • Keep windows and balconies in East/North for sunlight and fresh air.
  • Place the kitchen in South-East, facing East while cooking.
  • Master bedroom should be in South-West.
  • Keep the pooja room in the North-East corner.
  • Use light colors like white, yellow, or cream for walls.

Don’ts ❌

  • Avoid toilets in the North-East corner.
  • Don’t keep the center of the house heavy or cluttered.
  • Avoid irregular-shaped plots or homes.
  • Don’t use dark or dull colors on walls.
  • Avoid South-facing entrances unless remedies are applied.

Practical Applications

  • For New Homes: While constructing or designing, consult a vastu expert for the right room placements.
  • For Existing Homes: If the design is not vastu-friendly, simple remedies like mirrors, plants, lighting, or rearrangements can balance energies.
  • For Apartments: Even in flats, applying basic vastu principles for entrance, kitchen, and bedrooms makes a big difference.

Expert Note – Dr. Shivkumarr Gorey

“Home planning is not just about interiors—it’s about energy planning. A vastu-designed home naturally attracts prosperity and health. Even small corrections, like changing the placement of a bed or adding light to the North-East, can bring surprising improvements in life.”

With 22+ years of experience, Dr. Gorey has guided thousands of families with home vastu, vastu design, and practical remedies.
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Conclusion

Designing a home with vastu principles ensures that it becomes a true space of happiness and growth. From the entrance to the pooja room, each direction has its own importance. By aligning your home with vastu shastra, you invite positive energy, peace, and prosperity into your life.


FAQs

Q1. Which direction is best for the main entrance?
👉 North or East.

Q2. Where should the kitchen be in a home?
👉 South-East corner is best.

Q3. Which corner is ideal for the pooja room?
👉 North-East.

Q4. Can vastu apply to small apartments too?
👉 Yes, even flats benefit from vastu corrections.

Q5. What should be avoided in home design as per vastu?
👉 Toilets in North-East, cluttered center, and South-facing entrances


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फ्लॅट खरेदी करण्यापूर्वी त्याचा वास्तू समजून घ्या

फ्लॅट खरेदी करणे हा आयुष्यातील सर्वात मोठा निर्णय आणि गुंतवणूक असतो. बहुतांश लोक किंमत, लोकेशन आणि सुविधा यावर लक्ष देतात, पण एक महत्त्वाची गोष्ट दुर्लक्षित करतात—वास्तुशास्त्र.
फ्लॅट बाहेरून कितीही सुंदर दिसत असला, तरी जर त्यात मोठे वास्तुदोष असतील, तर तो कुटुंबासाठी तणाव, आर्थिक अडचणी आणि आरोग्य समस्यांना आमंत्रण देऊ शकतो.
हा ब्लॉग तुम्हाला फ्लॅट खरेदी करण्याआधी वास्तू का महत्त्वाचा आहे आणि कोणत्या गोष्टी तपासाव्यात हे सांगेल.

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फ्लॅटमध्ये वास्तू का महत्त्वाचा आहे

वास्तुशास्त्रात प्रत्येक दिशा आणि प्रत्येक कोपऱ्याची स्वतःची ऊर्जा असते. जर फ्लॅट बांधताना वास्तू लक्षात घेतले नाही, तर ऊर्जेचा नैसर्गिक प्रवाह बिघडतो. याचा थेट परिणाम कुटुंबातील शांती, प्रगती आणि आरोग्यावर होतो.

  • पूर्वाभिमुख फ्लॅट: सकारात्मकता, संधी आणि प्रगती आणतो.
  • उत्तराभिमुख फ्लॅट: संपत्ती आणि करिअरमध्ये यश देतो.
  • दक्षिणाभिमुख फ्लॅट: योग्य उपाय न केले तर आर्थिक व आरोग्य समस्या निर्माण करतो.
  • पश्चिमाभिमुख फ्लॅट: स्थैर्य देतो, पण प्रगती मंदावू शकते.

म्हणूनच फ्लॅट खरेदी करण्यापूर्वी त्याचा वास्तू तपासणे आवश्यक आहे.

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फ्लॅट वास्तूचे Do’s आणि Don’ts

Do’s ✅

  • मुख्य दरवाजा (प्रवेश) पूर्व किंवा उत्तर दिशेला असावा.
  • बाल्कनी किंवा खिडक्या उत्तर व पूर्व दिशेला असाव्यात जेणेकरून सूर्यप्रकाश आणि हवा मिळेल.
  • स्वयंपाकघर (Kitchen) दक्षिण-पूर्व अर्थात अग्निकोणात असावे.
  • शयनकक्ष (Bedroom) दक्षिण-पश्चिम दिशेला असावा जेणेकरून स्थैर्य मिळेल.
  • चौकोनी किंवा आयताकृती फ्लॅट सर्वोत्तम मानले जातात.

Don’ts ❌

  • ईशान्य (North-East) कोपऱ्यात शौचालय असलेले फ्लॅट टाळा.
  • कापलेले, वाकडे-तिकडे किंवा अनियमित आकाराचे फ्लॅट घेऊ नका.
  • दक्षिण-पश्चिम दिशेला प्रवेश असलेले फ्लॅट नकोत.
  • उत्तर दिशेला जड सामान किंवा कचरा ठेवू नका.
  • ईशान्य दिशेला स्वयंपाकघर टाळा.

व्यावहारिक उपयोग

  • खरेदीदारांसाठी: फ्लॅट बुक करण्यापूर्वी बिल्डरकडून वास्तू तपासा.
  • मालकांसाठी: आधीच फ्लॅट घेतला असेल आणि वास्तुदोष असतील तर तज्ज्ञांचा सल्ला घ्या. आरसे, झाडे, रंग किंवा फर्निचर बदलून ऊर्जा संतुलित करता येते.
  • गुंतवणूकदारांसाठी: वास्तूसुसंगत फ्लॅट लवकर विकले जातात आणि त्यांना चांगला दर मिळतो.

तज्ज्ञांचा सल्ला – डॉ. शिवकुमार गोरे

“फ्लॅट्स मोठ्या प्रमाणावर बांधले जातात आणि वास्तूकडे अनेकदा दुर्लक्ष केले जाते. पण कुटुंबासाठी हे छोटे दोषही मोठे परिणाम देतात. बांधकाम बदलता येत नसेल तरी, आरसे, झाडे किंवा रंग बदल यांसारखे सोपे उपाय करून घरातील ऊर्जा पुन्हा संतुलित करता येते.”

२२+ वर्षांच्या अनुभवासह, डॉ. गोरे यांनी ५०००+ कुटुंबे आणि बिल्डर्सना फ्लॅट वास्तू, वास्तू उपाय आणि गृह वास्तू सुधारणा दिल्या आहेत.
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निष्कर्ष

फ्लॅट खरेदी करण्याआधी त्याचा वास्तू तपासणे तितकेच आवश्यक आहे जितके कायदेशीर कागदपत्रे किंवा बिल्डरची विश्वासार्हता तपासणे. वास्तूसुसंगत फ्लॅट कुटुंबाला शांती, प्रगती आणि आर्थिक स्थैर्य देतो.
लक्षात ठेवा—आधीपासून फ्लॅटमध्ये काही दोष असले तरी सोप्या वास्तू उपायांनी जीवन अधिक चांगले करता येते.


FAQs

Q1. कोणता फ्लॅट सर्वात शुभ मानला जातो?
👉 पूर्वाभिमुख आणि उत्तराभिमुख फ्लॅट.

Q2. दक्षिणाभिमुख फ्लॅट चांगला असतो का?
👉 साधारणपणे नाही, पण योग्य उपायांनी संतुलित करता येतो.

Q3. फ्लॅटमध्ये स्वयंपाकघर कुठे असावे?
👉 दक्षिण-पूर्व (अग्निकोणात).

Q4. फ्लॅट खरेदी करताना वास्तू कसे तपासावे?
👉 मुख्य दरवाजा, स्वयंपाकघर, शयनकक्ष आणि लेआउट तपासा.

Q5. वास्तू खरोखर फ्लॅटवर परिणाम करते का?
👉 हो, ऊर्जेचा प्रवाह थेट आरोग्य, धन आणि शांतीवर परिणाम करतो.


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फ्लैट खरीदने से पहले उसका वास्तु समझें

फ्लैट खरीदना ज़िंदगी का सबसे बड़ा निवेश होता है। लोग अक्सर कीमत, लोकेशन और सुविधाओं पर ध्यान देते हैं, लेकिन एक अहम चीज़ को नज़रअंदाज़ कर देते हैं—वास्तु शास्त्र
फ्लैट बाहर से कितना भी आकर्षक क्यों न लगे, अगर उसमें बड़े वास्तु दोष हैं, तो यह परिवार के लिए तनाव, आर्थिक परेशानियाँ और स्वास्थ्य समस्याएँ ला सकता है।
यह ब्लॉग आपको बताएगा कि फ्लैट खरीदने से पहले वास्तु क्यों ज़रूरी है और किन बातों पर ध्यान देना चाहिए।

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फ्लैट्स में वास्तु क्यों ज़रूरी है

वास्तु शास्त्र में हर दिशा और हर कोना अपनी ऊर्जा लेकर आता है। अगर फ्लैट बिना वास्तु ध्यान दिए बनाया गया है, तो प्राकृतिक ऊर्जा का प्रवाह रुक जाता है। इसका असर घर की शांति, परिवार की तरक्की और सेहत पर पड़ सकता है।

  • पूरबमुखी फ्लैट: सकारात्मकता, अवसर और स्वस्थ विकास लाते हैं।
  • उत्तरमुखी फ्लैट: धन और करियर में उन्नति देते हैं।
  • दक्षिणमुखी फ्लैट: यदि सुधारा न जाए तो आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी परेशानी ला सकते हैं।
  • पश्चिममुखी फ्लैट: स्थिरता देते हैं, लेकिन प्रगति धीमी हो सकती है।

इसीलिए फ्लैट खरीदने से पहले वास्तु को समझना ज़रूरी है।


फ्लैट वास्तु के Do’s और Don’ts

Do’s ✅

  • प्रवेश द्वार (Main Entrance) पूरब या उत्तर दिशा में होना चाहिए।
  • बालकनी और खिड़कियाँ उत्तर या पूरब में रखें ताकि रोशनी और हवा अच्छी मिले।
  • रसोईघर (Kitchen) दक्षिण-पूर्व यानी अग्नि कोण में हो।
  • शयनकक्ष (Bedroom) दक्षिण-पश्चिम में हो ताकि स्थिरता मिले।
  • चौकोर या आयताकार आकार वाले फ्लैट चुनें।

Don’ts ❌

  • ईशान कोण (North-East) में शौचालय वाले फ्लैट न लें।
  • कटे-फटे या टेढ़े-मेढ़े आकार वाले फ्लैट न चुनें।
  • दक्षिण-पश्चिम में प्रवेश द्वार वाले फ्लैट से बचें।
  • उत्तर दिशा में भारी सामान या कबाड़ न रखें।
  • ईशान कोण (North-East) में रसोई न बनाएं।

व्यावहारिक उपयोग

  • खरीदारों के लिए: खरीदने से पहले बिल्डर से वास्तु कम्प्लायंस पूछें।
  • मौजूदा फ्लैट्स के लिए: अगर पहले से फ्लैट ले लिया है और उसमें दोष हैं, तो वास्तु विशेषज्ञ से सलाह लेकर रंग, पौधे, आइने या फर्नीचर बदलकर सुधार कर सकते हैं।
  • निवेशकों के लिए: वास्तु-फ्रेंडली फ्लैट्स जल्दी बिकते हैं और बेहतर कीमत दिलाते हैं।

विशेषज्ञ की राय – डॉ. शिवकुमार गोरे

“फ्लैट्स अक्सर बड़े पैमाने पर बनाए जाते हैं और वास्तु की बारीकियों को नजरअंदाज कर दिया जाता है। लेकिन परिवार के लिए ये छोटे-छोटे दोष बड़ी समस्याएँ बन सकते हैं। अगर निर्माण बदलना संभव न हो, तो भी लागू वास्तु उपाय जैसे आइने, पौधे और रंग बदलाव से ऊर्जा का संतुलन लौटाया जा सकता है।”

22+ साल के अनुभव के साथ, डॉ. गोरे ने 5000+ परिवारों और बिल्डर्स को फ्लैट वास्तु, वास्तु उपाय और गृह वास्तु सुधार दिए हैं।
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निष्कर्ष

फ्लैट खरीदने से पहले उसका वास्तु देखना उतना ही ज़रूरी है जितना कानूनी कागज़ात या बिल्डर की विश्वसनीयता। वास्तु-फ्रेंडली फ्लैट परिवार के लिए शांति, तरक्की और आर्थिक स्थिरता लाता है।
याद रखें—अगर आपके फ्लैट में पहले से कुछ दोष हैं, तो भी सरल वास्तु उपाय से जीवन बेहतर बनाया जा सकता है।


FAQs

Q1. कौन-सा फ्लैट वास्तु अनुसार सबसे अच्छा है?
👉 पूरब और उत्तरमुखी फ्लैट सबसे शुभ माने जाते हैं।

Q2. क्या दक्षिणमुखी फ्लैट ठीक है?
👉 आमतौर पर नहीं, लेकिन सही उपायों से संतुलित किया जा सकता है।

Q3. फ्लैट में रसोई की सबसे अच्छी दिशा कौन-सी है?
👉 दक्षिण-पूर्व (अग्नि कोण)।

Q4. फ्लैट खरीदते समय वास्तु कैसे चेक करें?
👉 मुख्य द्वार, रसोई, शयनकक्ष और लेआउट को देखें।

Q5. क्या वास्तु वास्तव में फ्लैट्स पर असर डालता है?
👉 हाँ, ऊर्जा का प्रवाह सीधे सेहत, धन और शांति को प्रभावित करता है।


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Understand the Vastu of a Flat Before Buying It

Buying a flat is one of the biggest investments in life. While most people focus on location, price, and amenities, they often overlook one vital factor—Vastu Shastra. A flat may look beautiful from the outside, but if it has major vastu doshas (imbalances), it can bring stress, financial struggles, or health issues for the family.
This blog will help you understand the importance of vastu for flats and guide you on what to check before making a purchase.

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Why Vastu Matters in Flats

In Vastu Shastra, every direction and space carries energy. When flats are constructed without vastu considerations, the natural flow of energy is disturbed. This imbalance may affect peace of mind, growth, and family harmony.

  • East-facing flats: Attract positivity, opportunities, and healthy growth.
  • North-facing flats: Bring financial prosperity and career success.
  • South-facing flats: Can create health and financial concerns if not corrected.
  • West-facing flats: Give stability, but progress may be slower without remedies.

That’s why understanding the Vastu of a flat before buying is essential.

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Do’s and Don’ts for Flat Vastu

Do’s ✅

  • Choose flats with entrances in East or North direction.
  • Keep balconies or windows in North or East for sunlight and ventilation.
  • Ensure the kitchen is in South-East (Agni corner).
  • Bedrooms should be in South-West for stability.
  • Flats with a square or rectangular shape are best.

Don’ts ❌

  • Avoid flats with toilets in the North-East corner.
  • Don’t buy flats with cuts or irregular shapes.
  • Avoid South-West entrances, as they may bring imbalance.
  • Don’t keep heavy storage or clutter in the North.
  • Avoid flats with kitchens in North-East.

Practical Applications

  • For Buyers: Always ask builders about vastu compliance before finalizing.
  • For Existing Flats: If you already own a flat with vastu doshas, consult an expert for simple vastu remedies like color changes, placements, or symbolic corrections.
  • For Investors: Vastu-friendly flats sell faster and at better value, making them a good investment.

Expert Note – Dr. Shivkumarr Gorey

“Flats are often built in bulk without paying attention to vastu. But for families, these small imbalances affect daily life. Even if you can’t change construction, applied vastu remedies like rearrangements, mirrors, plants, or colors can restore energy balance and bring peace.”

With 22+ years of experience, Dr. Gorey has guided 5000+ families and builders with flat vastu, vastu remedies, and home vastu corrections.
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Conclusion

Understanding vastu before buying a flat is as important as checking legal papers or builder reputation. A vastu-friendly flat ensures peace, growth, and financial stability for the family. Remember—even if you already own a flat with issues, practical remedies can balance energy and improve your life.


FAQs

Q1. Which facing flat is best as per vastu?
👉 East and North facing are considered most auspicious.

Q2. Can South-facing flats be good?
👉 Not usually, but with remedies they can be balanced.

Q3. What is the best direction for kitchen in a flat?
👉 South-East corner is ideal.

Q4. How to check vastu before buying a flat?
👉 Look at entrance, kitchen, bedroom placement, and overall layout.

Q5. Does vastu really affect flats?
👉 Yes. Energy flow in flats directly impacts health, wealth, and harmony.


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किचनसाठी योग्य रंग – वास्तु शास्त्रानुसार काय जाणून घ्यावं?

किचन म्हणजे प्रत्येक घराचं ऊर्जेचं पॉवरहाऊस आहे. इथे जेवण तयार होतं आणि त्याचा थेट परिणाम संपूर्ण कुटुंबाच्या आरोग्यावर, ऊर्जेवर आणि समृद्धीवर होतो. किचन वास्तु शास्त्रानुसार, केवळ चुलीची किंवा सिंकची मांडणीच नाही तर किचनचे रंग सुद्धा ऊर्जा संतुलित ठेवण्यासाठी फार महत्त्वाचे असतात.

चुकीचे रंग वापरल्यास घरात वादविवाद, आर्थिक तोटा किंवा आरोग्याच्या समस्या वाढू शकतात. पण योग्य रंग निवडल्यास घरात सामंजस्य, सकारात्मकता आणि समृद्धी येते. म्हणूनच वास्तु कन्सल्टंट नेहमीच किचनचे रंग वास्तुनुसार निवडण्याचा सल्ला देतात.

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किचनमध्ये रंगांचं महत्त्व

वास्तु शास्त्रात, प्रत्येक रंग पाच तत्त्वांशी (अग्नी, जल, पृथ्वी, वायू, आकाश) जोडलेला असतो. किचन हा अग्नी तत्त्वाशी संबंधित असल्यामुळे इथे रंगांची निवड अजून महत्वाची ठरते.

  • South-East Kitchen (अग्नी कोन): नारिंगी, लाल किंवा गुलाबी रंग शुभ.
  • North-West Kitchen: किचनसाठी आदर्श नाही, पण असेल तर हलका ग्रे, क्रीम किंवा पांढरा रंग संतुलन आणतो.
  • North-East Kitchen: किचनसाठी योग्य नाही, असल्यास तज्ज्ञांचा सल्ला घ्या.
  • South-West Kitchen: किचनसाठी योग्य नाही, असल्यास तज्ज्ञांचा सल्ला घ्या.

योग्य किचन रंग वास्तु पाळल्यास कुटुंबाचं आरोग्य सुधारतं, नात्यांमध्ये गोडवा येतो आणि आर्थिक स्थैर्य मिळतं.

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Do’s ✅

  • किचनमध्ये पिवळा, नारिंगी आणि हिरवा असे चमकदार रंग वापरा.
  • ऊर्जा, उत्साह आणि जीवनशक्ती दाखवणारे रंग निवडा.
  • आधुनिक लुकसाठी पेस्टल शेड्स वापरा.
  • स्टोरेज आणि कपाटं हलक्या, शांत रंगात ठेवा.
  • टाईल्स आणि बॅकस्प्लॅशही वास्तुनुसार निवडा.

Don’ts ❌

  • काळा किंवा गडद ग्रे टाळा—हे ऊर्जा अडवतात.
  • डल शेड्स वापरू नका—हे भूक व उत्साह कमी करतात.
  • South-East किचनमध्ये निळा रंग वापरू नका—तो अग्नी तत्त्वाशी भिडतो.
  • लाल रंगाचं अतिरेक टाळा—यामुळे राग व तणाव वाढतो.
  • तुटक्या टाईल्स किंवा उडालेला रंग वापरू नका.

व्यावहारिक उपयोग

  • मॉड्युलर किचन: कॅबिनेट्सला चमकदार रंग आणि भिंतींना क्रीम रंग वापरा.
  • लहान फ्लॅट: हलके पेस्टल रंग वापरून किचन मोठं आणि मोकळं दिसेल.
  • आधुनिक घरं: टाईल्स आणि बॅकस्प्लॅश वास्तुनुसार रंगीत ठेवा.
  • रेस्टॉरंट/कॅफे: नारिंगी आणि पिवळा रंग ग्राहकांना आकर्षित करतो आणि भूक वाढवतो.
  • रिनोव्हेशन: फक्त परदे, वॉलपेपर किंवा शेल्फचे रंग बदलले तरी वास्तु संतुलन मिळू शकतं.

तज्ज्ञांची टिप – डॉ. शिवकुमारर गोरे

“किचन ही ती जागा आहे जिथे अग्नी ऊर्जा अन्नामध्ये रूपांतरित होते. त्यामुळे इथले रंग नेहमी वास्तुनुसार निवडले पाहिजेत. चुकीचे रंग आरोग्य आणि आर्थिक स्थिती बिघडवतात, तर योग्य रंग आनंद आणि समृद्धी आणतात.”

२२+ वर्षांच्या अनुभवातून डॉ. गोरे यांनी ५०००+ कुटुंबं व व्यवसायांना किचन वास्तु शास्त्र, वास्तु उपाय आणि मॉड्युलर किचन वास्तु याबाबत मार्गदर्शन दिलं आहे.
👉 कन्सल्टेशनसाठी संपर्क: The Vastusukh | +91 96735 91055

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निष्कर्ष

किचन वास्तु रंग निवडणं हे फक्त इंटेरियर डिझाईन नाही, तर ऊर्जा संतुलनाचं विज्ञान आहे. नारिंगी, पिवळा आणि हिरवा असे उजळ आणि उबदार रंग आरोग्य, सकारात्मकता आणि आर्थिक स्थिरता वाढवतात.
लक्षात ठेवा—फक्त भिंती, कपाटं किंवा डेकोरचा रंग बदलला तरी प्रभावी वास्तु सुधारणा करता येते.


FAQs

Q1. किचनसाठी सर्वात शुभ रंग कोणते?
👉 नारिंगी, पिवळा आणि हिरवा.

Q2. किचनमध्ये काळा रंग वापरता येतो का?
👉 नाही. काळा आणि गडद ग्रे टाळा.

Q3. South-East किचनसाठी कोणते रंग योग्य आहेत?
👉 नारिंगी, गुलाबी आणि लाल.

Q4. जर किचन North-West मध्ये असेल तर कोणते रंग वापरावेत?
👉 पांढरा, हलका ग्रे किंवा क्रीम.

Q5. मॉड्युलर किचनलाही वास्तु रंग लागू होतात का?
👉 हो. प्रत्येक किचनमध्ये रंग वास्तु महत्त्वाचे असतात.


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